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Overweight और Obesity में क्या अंतर है?

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Overweight और Obesity में क्या अंतर है? आजकल हम सब किसी न किसी दिन कहते हैं  “यार, वजन बढ़ गया है…” लेकिन सच ये है कि 👉 वजन बढ़ना हर बार बीमारी नहीं होता। कभी ये सिर्फ warning होता है, और कभी problem । यहीं से बात आती है Overweight और Obesity की। Overweight क्या होता है? Overweight का मतलब ये नहीं कि आप बीमार हो गए। इसका मतलब बस इतना है कि 👉 शरीर में जितनी ज़रूरत थी, उससे थोड़ी ज़्यादा चर्बी जमा हो गई है। जैसे – खाना थोड़ा ज़्यादा चलना-फिरना थोड़ा कम और आराम ज़्यादा अभी शरीर कह रहा है: ⚠️ “संभल जाओ, वरना आगे दिक्कत होगी।” तकनीकी भाषा में  जब BMI (Body Mass Index) 25 से 29.9 के बीच होता है,तो उसे Overweight कहते हैं। Obesity क्या होती है? Obesity कोई “थोड़ा मोटा” होना नहीं है। 👉 ये वो stage है जहाँ चर्बी शरीर पर हावी होने लगती है।अब वजन सिर्फ दिखने की चीज़ नहीं रहता, बल्कि: सांस फूलने लगती है घुटनों में दर्द जल्दी थकान बीपी, शुगर की एंट्री तकनीकी तौर पर,जब BMI 30 के पार चला जाए,तो डॉक्टर इसे Obesity कहते हैं।यानी अब मामला serious है। Diet दोनों में क्यों ज़...

फ्लो: जब हम काम में बहने लगते हैं

🌊 फ्लो: जब हम काम में बहने लगते हैं कभी आपने महसूस किया है कि कोई काम करते-करते समय का पता ही नहीं चला? घड़ी देखी तो कई घंटे बीत चुके थे, थकान भी नहीं थी, और मन पूरी तरह संतुष्ट था। इसी अनुभव को Flow (फ्लो) कहा जाता है। 🌿 फ्लो क्या होता है? फ्लो वह अवस्था है जब हमारा पूरा ध्यान सिर्फ वर्तमान काम पर होता है न अतीत की चिंता रहती है न भविष्य की फिक्र उस समय: मन शांत होता है शरीर और दिमाग एक साथ काम करते हैं “मैं” का अहंकार भी कुछ देर के लिए गायब हो जाता है हम काम का हिस्सा बन जाते हैं । ⛷️ फ्लो का अनुभव कैसा होता है? किताब में एक उदाहरण दिया गया है: मान लीजिए आप बर्फीली ढलान पर स्कीइंग कर रहे हैं। बर्फ दोनों ओर उड़ रही है। परिस्थिति बिल्कुल सही है। आप यह नहीं सोचते कि अगला कदम क्या होगा — शरीर खुद जानता है क्या करना है। उस पल: न भविष्य है न अतीत सिर्फ वर्तमान है यही फ्लो है। 🧠 समय क्यों गायब हो जाता है? जब हम किसी काम को मज़े से और पूरे ध्यान से करते हैं, तो समय का एहसास खत्म हो जाता है। खाना बनाते-बनाते घंटों निकल जाते हैं किताब पढ़ते-पढ़त...

WBC (White Blood Cells) हमें बीमारियों से कैसे बचाती हैं? 🛡️🩸सरल भाषा में समझिए

🛡️🩸WBC (White Blood Cells) हमें बीमारियों से कैसे बचाती हैं?  समझिए सरल भाषा में 👇 🔍दुश्मन की पहचान (Recognition) जब कोई बैक्टीरिया, वायरस, फंगस या परजीवी शरीर में घुसता है तो  WBC उन्हें तुरंत पहचान लेती हैं कि यह अपने शरीर का हिस्सा नहीं है। 🚨WBC एक सिग्नल देती हैं । उस जगह सूजन (Inflammation) आती है। खून की सप्लाई बढ़ती है,  और ज्यादा WBC वहाँ पहुँचती हैं।इसलिए चोट या इन्फेक्शन में जगह लाल और गर्म हो जाती हैं। 🍽️ दुश्मन को खा जाना कुछ WBC  बीमारी पैदा करने वाले माइक्रोब्स को घेरकर निगल लेती हैं। 🎯एंटीबॉडी बनाना कुछ खास WBC (B-Cells)  एंटीबॉडी बनाती हैं। ये एंटीबॉडी वायरस/बैक्टीरिया पर चिपककर  उन्हें कमजोर या नष्ट कर देती हैं।  👉 यही कारण है कि वैक्सीन काम करती है। 🧠 याद रखना  कुछ WBC उस बीमारी को याद रखती हैं। अगली बार वही बीमारी आए तो  शरीर बहुत तेजी से लड़ता है  बीमारी गंभीर नहीं बनती । ➡️ इसे कहते हैं इम्युनिटी (Immunity)

Right to Disconnect

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Right to Disconnect — आसान भाषा में आज के समय में हमारे मोबाइल और लैपटॉप नेवो काम और निजी जिंदगी के बीच की लाइन लगभग मिटा दी है। ऑफिस का टाइम खत्म हो भी जाए, तब भी ईमेल, कॉल या व्हाट्सऐप मैसेज आते रहते हैं। इसी समस्या को समझते हुए दुनिया के कई देशों ने एक नया अधिकार बनाया— Right to Disconnect । इसका मतलब बहुत सीधा है: ड्यूटी खत्म होने के बाद आपको काम से जुड़े कॉल या मैसेज का जवाब देने की कोई मजबूरी नहीं है—और अगर आप जवाब न दें तो कोई सज़ा भी नहीं मिल सकती। यह अधिकार कर्मचारियों को अपने परिवार, आराम और निजी समय के लिए स्पेस देता है। कई कंपनियाँ तो अब डिजिटल वेलनेस ट्रेनिंग और “नो आफ्टर ऑवर्स कॉल” जैसी नीतियाँ भी बना रही हैं, ताकि कर्मचारियों का तनाव कम हो और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहे। दुनिया में इसे कैसे अपनाया गया? फ्रांस फ्रांस इस अधिकार को कानूनी रूप देने वाला पहला देश था। वहाँ कंपनियों को यह तय करना पड़ता है कि कर्मचारियों से ऑफिस टाइम के बाद कैसे और कब संपर्क किया जाएगा। मतलब—काम तो होगा, लेकिन स्वस्थ तरीके से। ऑस्ट्रेलिया ऑस्ट्रेलिया ने 2024 में कानून ब...

SIR

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Special Intensive Revision (SIR):-  वोटर लिस्ट को अपडेट करने की ऐसी संवैधानिक प्रक्रिया होता है, जिसे चुनाव आयोग तब चलाता है जब किसी क्षेत्र की मतदाता सूची को जल्दी और पूरी तरह अपडेट करना जरूरी हो।  इसमें बहुत तेज़ी से—नियत समय के भीतर—पूरी मतदाता सूची की जाँच, सुधार और नए नाम जोड़ने का काम किया जाता है। इसको इस उदाहरण के साथ समझिए मान लीजिए जिला – गुमला में वोटर लिस्ट बहुत पुरानी है। कई नए युवा 18 साल के हो गए हैं, कुछ लोग गाँव छोड़कर चले गए हैं, और कुछ लोगों की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन इन बदलावों का अपडेट वोटर लिस्ट में नहीं हुआ है। अब अचानक वहाँ लोकसभा चुनाव घोषित हो जाता है। चुनाव आयोग चाहता है कि एकदम सही और अपडेटेड वोटर लिस्ट तैयार हो। इसलिए आयोग आदेश देता है: “गुमला जिले में Special Intensive REVISION (SIR) चलाया जाए।” BLO हर घर में जाकर पूछता है: ✔ कौन 18 वर्ष का हो गया? ✔ कौन बाहर नौकरी पर चला गया? ✔ कोई मृत्यु हुई है? ✔ किसी का नाम गलत है? नए मतदाता → Form-6 भरे जाते हैं । मृत/शिफ्टेड लोग → Form-7 भरे जाते हैं। नाम/पता/उम्र सुधार → Form-8 भरे जाते हैं। डु...

Gene Editing

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कुछ बीमारियाँ ऐसी होती हैं, जो DNA में मौजूद जीन की गड़बड़ी के कारण  हमें जन्म के साथ ही मिल जाती हैं। क्योंकि वे हमारे DNA की पुरानी लिखावट में  पहले से दर्ज होती हैं। जैसे कि लेकिन आज विज्ञान कहता है: अगर इस लिखावट में कोई गलती हो, तो उसे सुधारा भी जा सकता है। DNA की पंक्तियाँ दोबारा लिखी जा सकती हैं, ताकि विरासत में बीमारी नहीं, बेहतर स्वास्थ्य मिले। इसको इस उदाहरण से समझने की कोशिश करें। जैसे कि मुझे लिखना था— “मैं एक लड़का हूँ”, लेकिन अगर गलती से लिख दूँ— “मैं एक लड़की हूँ”,।  सिर्फ  बस एक मात्रा का अंतर, लेकिन पहचान पूरी बदल गई— Male से Female। ठीक इसी तरह , हमारे DNA में भी  बस एक छोटा-सा बदलाव एक “मात्रा” जैसा mutation  पूरी विशेषता बदल सकता है।

डिजिटल ट्विंस टेक्नोलॉजी

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जय हिन्द दोस्तों! मैं विनोद ओरांव, लैबोरेटरी टेक्नोलॉजिस्ट। आज मैं आपको डायग्नोस्टिक दुनिया का भविष्य दिखाने वाला हूँ — जहाँ टेक्नोलॉजी, सिर्फ आप का इलाज ही नहीं करेगी,  बल्कि, बीमारी आने से पहले ही आपको अलर्ट कर देगी!    अब ज़रा सोचिए — जैसे हम किसी कागज़ की फोटोकॉपी निकालते हैं,  वैसे ही अब हमारे शरीर की भी डिजिटल कॉपी बनेगी।  जी हां दोस्तों मैं बात कर रहा हूं डिजिटल ट्विंस की। अब बात आती है अगर किसी के शरीर का डिजिटल ट्विंस या जुड़वां बनाया जाता है तो उसके लिए हमारे शरीर से जुड़ी सैकड़ो तरह की जानकारी ली जाएगी जो कि रियल टाइम में अपडेट भी होता रहेगा। शारीरिक या Biological Data यह डेटा हमारे शरीर की basic structure और जेनेटिक जानकारी से जुड़ा होता है: जैसे कि  DNA और Genes की जानकारी। Blood Group और Cell Structure Hormonal profile Organ structure (जैसे कि दिल, फेफड़े, किडनी का 3D मॉडल) हड्डियों और मांसपेशियों की बनावट   Health & Medical Data यह डेटा डॉक्टर और AI सिस्टम को हमारे शरीर की स्थिति समझने में मदद करता है जैसे कि  Blood...